एय चारा गरो
हम सोख्ता सामां हैं हमें यूँ न सताओ
आए हो अगर पास तो' यूँ दूर न जाओ
गिरते हुए बिजली को इन आँखों ने है देखा
किस किस के नशेमन पे गिरी है'न बताओ
अब थक सा गया हूँ मैं अबद तक न उठूं गा
आगोश मैं अपनी मुझे हरगिज़ न सुलाओ
क्या इस से भी बढ़ कर कोई रुसवाई की हद है ?
रहने भी दो अब कोई नया गुल न खिलाओ
आया हूँ मैं ख़ुद छोड़ के जलता हुआ गुलशन
एय चारा गरो फिर मुझे वापस न बुलाओ
रहने भी दो कुछ नक्शे कुहन रह जो गए हैं
मैं मिट तो चुका हूँ मुझे इतना न मिटाओ
अहमद जो सुनें गे तो हंसें गे यह सभी लोग
रूदादे चमन तुम इन्हें हरगिज़ न सुनाओ
अहमद इरफान
आए हो अगर पास तो' यूँ दूर न जाओ
गिरते हुए बिजली को इन आँखों ने है देखा
किस किस के नशेमन पे गिरी है'न बताओ
अब थक सा गया हूँ मैं अबद तक न उठूं गा
आगोश मैं अपनी मुझे हरगिज़ न सुलाओ
क्या इस से भी बढ़ कर कोई रुसवाई की हद है ?
रहने भी दो अब कोई नया गुल न खिलाओ
आया हूँ मैं ख़ुद छोड़ के जलता हुआ गुलशन
एय चारा गरो फिर मुझे वापस न बुलाओ
रहने भी दो कुछ नक्शे कुहन रह जो गए हैं
मैं मिट तो चुका हूँ मुझे इतना न मिटाओ
अहमद जो सुनें गे तो हंसें गे यह सभी लोग
रूदादे चमन तुम इन्हें हरगिज़ न सुनाओ
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