Thursday, October 15, 2009

शुर्फाए लखनऊ

शुर्फाये लखनऊ
कहने को हम ज़रूर हैं शुर्फाए लखनऊ
इस क़ौल का तज़ाद हैं शुर्फाए लखनऊ
वोह और थे जो सुए फ़लक कूच कर गए
बाकी हैं अब तो नाम के शुर्फाए लखनऊ
माज़ी से बहरा मंद हैं फ़र्दा से बे खबर
कैसे अजीब लोग हैं शुर्फाए लखनऊ
जाहो हषम में इनका सा कोई हो सका
मौज़ूए मुश्ते खाक हैं शुर्फाए लखनऊ
हर फ़र्द मुब्तिला है यूँ फ़ुस्क़ो फ़ुजूर में
इज्जत मोआब फिर भी हैं शुर्फाए लखनऊ
दामे क़फ़स में आया है इरफान ऐ बे अमां
हालात साज़गार हैं शुर्फाए लखनऊ
अहमद इरफान

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